देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन और शैक्षिक व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तुष्टिकरण आधारित शिक्षा व्यवस्था के स्थान पर सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों पर विभाग के निर्धारित नियम और शैक्षिक मानक समान रूप से लागू होंगे। नियमों का पालन करना सभी संबंधित संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा।
पुलिस लाइन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री से शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों के संबंध में सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि जब मदरसे शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के रूप में संचालित हो रहे हैं, तो उन्हें विभाग के नियमों के अनुरूप ही काम करना होगा। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता सुनिश्चित करना और प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के समान अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार की ओर से तय शैक्षिक मानकों का पालन सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों को करना होगा। इस व्यवस्था के तहत शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित पढ़ाई और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर जोर दिया जा रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने भी मदरसों के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश नहीं रखा जा सकेगा। इन संस्थानों को बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा देनी होगी और निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालन करना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए जो समय निर्धारित किया गया है, उसके अनुरूप मदरसों को अपनी शैक्षिक गतिविधियां संचालित करनी होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित रूप से हो और शिक्षा विभाग के तय मानकों का पालन किया जाए। सरकार के इस रुख से शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन में निर्धारित शैक्षिक नियमों के पालन का मुद्दा केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए नियमों में एकरूपता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर रहेगा। वहीं, विभागीय स्तर पर नियमित पढ़ाई और निर्धारित समय-सारिणी का पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में मान्यता प्राप्त मदरसों को भी शिक्षा विभाग के नियमों और शैक्षिक मानकों के अनुरूप संचालन करना होगा।