Oct 23, 2026
govt-ads

रेखा आर्या प्रकरण पर धामी का बड़ा बयान! कहा-ऑडियो में आरोप लगाने से कोई दोषी साबित नहीं होता,निष्पक्ष जांच पर जोर

post-img

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच गहराया पारिवारिक व व्यावसायिक विवाद गर्माया हुआ है। 210 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुलकर अपनी कैबिनेट सहयोगी के बचाव में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है, वहीं पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई पर भी पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े विवाद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। एक ओर मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर 210 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी ऑडियो में किसी के आरोप लगा देने मात्र से वे सही साबित नहीं हो जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है। जांच किसी के राजनीतिक लाभ या किसी को निशाना बनाने की मंशा से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि संबंधित पक्षों के बीच 22 वर्षों से संबंध रहे हैं, तो इतने समय बाद आरोप सामने आने के कारणों को भी समझना जरूरी है। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान से मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता। इसकी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। प्रकरण के अनुसार, पिछले सप्ताह मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शादी के बाद से ही उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा। इसके अतिरिक्त, कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में कथित धोखाधड़ी किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, कंपनी के दस्तावेजों में कथित रूप से जाली कागजात का इस्तेमाल कर रेखा आर्या का नाम निदेशक पद से हटा दिया गया। विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और मारपीट की कोशिश किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में दस सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। जांच दल तीन दिन पहले मंत्री रेखा आर्या के बयान दर्ज कर चुका है। बताया जा रहा है कि मंत्री ने जांच अधिकारियों को कुछ अतिरिक्त जानकारियां देने के साथ उन संभावित स्थानों के बारे में भी बताया है, जहां से कथित जाली दस्तावेज बरामद किए जा सकते हैं। फिलहाल एसआईटी दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने में लगी है। जांच की दिशा अब इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कथित दस्तावेज कहां से बरामद होते हैं और उनकी सत्यता की पुष्टि कैसे होती है। इस बीच गिरधारी लाल साहू का पता नहीं चलने की जानकारी सामने आई है। कुछ खबरों में उनके उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल चले जाने की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में पुलिस के सामने उनकी तलाश करने और मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने की चुनौती है। रेखा आर्या प्रकरण में मुख्यमंत्री का बयान सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच पर जोर देने के रूप में सामने आया है। लेकिन इस मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। सवाल केवल आरोपों का नहीं, बल्कि उनकी निष्पक्ष जांच, कथित वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल और शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों की सत्यता का भी है। अब देखना होगा कि एसआईटी कब तक जांच को निर्णायक दिशा देती है और पुलिस संबंधित पक्षों से जुड़े तथ्यों को किस तरह सामने लाती है।