Oct 20, 2026
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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज: 10 सीटों पर बनेंगे 2,045 पोलिंग बूथ, बर्फबारी से निपटने के लिए तैयार हुआ एक्शन प्लान

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्वाचन कार्यों के लिए तैनात सभी नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें चुनाव तैयारियों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

उत्तराखंड में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले के सभी 10 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 2,045 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें 766 ग्रामीण और 1,279 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। वहीं, फरवरी में 65 पोलिंग स्टेशनों पर बर्फबारी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने अभी से वैकल्पिक व्यवस्था और आकस्मिक योजना तैयार करने पर जोर दिया है। निर्वाचन कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को निर्वाचन तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को पोलिंग स्टेशनों पर बिजली, पेयजल, रैंप, शेड और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही, मतदेय स्थलों के नामों का सत्यापन करने और चार से पांच बूथ वाले मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के प्रवेश तथा निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाने के निर्देश दिए। जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम निर्वाचन व्यवस्था के सामने चुनौती बन सकता है। जिलाधिकारी ने बताया कि फरवरी में 65 पोलिंग स्टेशनों पर बर्फबारी की संभावना है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों के लिए पहले से आकस्मिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खराब मौसम के कारण मतदान संबंधी व्यवस्थाएं प्रभावित न हों। इसके अलावा मसूरी क्षेत्र के सात और चकराता क्षेत्र के 12 पोलिंग स्टेशन अभी भी नेटवर्क की पहुंच से बाहर यानी छाया क्षेत्र में हैं। जिलाधिकारी ने इन केंद्रों पर संचार सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। निर्वाचन के दौरान सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान और अधिकारियों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए नेटवर्क की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिले की सीमाएं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर तथा उत्तराखंड के चार अन्य जनपदों से लगती हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्वाचन के दौरान अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चेकपोस्ट स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने उड़नदस्ता दल (एफएसटी) और वीडियो निगरानी दल (वीएसटी) गठित कर उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा। सीमावर्ती क्षेत्रों में नकदी और शराब की तस्करी रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिले में कुल 11,94,797 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 6,17,041 पुरुष, 5,77,706 महिलाएं और 50 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। जिले में 10,201 दिव्यांगजन और 85 वर्ष से अधिक आयु के 7,845 मतदाता भी हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा और दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर, स्वयंसेवक, डोली तथा पालकी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं। उद्देश्य यह है कि कोई भी पात्र मतदाता सुविधाओं के अभाव में मतदान से वंचित न रहे। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता (स्वीप) कार्यक्रम के तहत विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी ने 50 प्रतिशत से कम मतदान वाले बूथों को चिह्नित कर वहां मतदाता जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए। ऐसे केंद्रों की भी पहचान की जाएगी, जहां पुरुषों या महिलाओं का मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं का प्रारूप-6 के माध्यम से मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करने और उनके मतदाता पहचान पत्र बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का जोर मतदान केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, मौसम और नेटवर्क संबंधी चुनौतियों से निपटने, सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने तथा अधिकाधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इन तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।